देवदास

दौड़ आती पैरों पायल सजाये
यह देते हाथों चूड़ी सजाये
समझते आंखें काजल सजाये
जरा मेरा भी ख्याल रखो ना
बस सात दिन भी अशुभ तुम बिन

बच्चों से खेलती लुका-छिपी
कभी उन से छुपती हो तू
कभी उन को ढूंढ़ती हो तू
जरा मुझे भी तू ढूंढो ना
बस छह दिन में ढूंढा तुझे

दर्द में भी हंसती हो तू
दुखी से भी पूछती हो तू
खुशी को भी बांटती हो तू
जरा मुझे भी बदलओ ना
बस पांच दिन की बात है

बारिश से छू रही मुझे
हवा से छू रही मुझे
रोशनी से छू रही मुझे
जरा हाथ पकड़े चलो ना
बस चार कदम यहां से

तोता जैसे गाती हो तू
कोयल जैसे बोलती हो तू
मोर जैसे नाचती हो तू
जरा मुझे भी सिखाओ ना
बस तीन दिन भी काफी है

यह चांद में दिखती तू
यह तारों में दिखती तू
यह बादलों में दिखती तू
जरा पास में तो बैठो ना
बस दो घूंट चाय हो जाए

मेरे सपनों में रहती तू
मेरे यादों में रहती तू
मेरे सोचों में रहती तू
जरा सामने तो आओना
बस छोटी सी एक मुस्कान

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