देवदास

दौड़ आती पैरों पायल सजाये यह देते हाथों चूड़ी सजाये समझते आंखें काजल सजाये जरा मेरा भी ख्याल रखो ना बस सात दिन भी अशुभ तुम बिन बच्चों से खेलती लुका-छिपी कभी उन से छुपती हो तू कभी उन को ढूंढ़ती हो तू जरा मुझे भी तू ढूंढो ना बस छह दिन में ढूंढा तुझे दर्द में भी हंसती हो तू दुखी से भी पूछती हो तू खुशी को भी बांटती हो तू जरा मुझे भी बदलओ ना बस पांच दिन की बात है बारिश से छू रही मुझे हवा…

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